Rajiv Dixit Biography In Hindi

Rajiv Dixit Biography

Read in English

Rajiv Dixit प्रारंभिक जीवन

     नमस्कार दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे शख्स के बारे में कुछ जानकारी देने जा रहा हूं। जिससे पुरा यूरोप कांप गया था। आज मैं भी उनका नाम बड़े गर्व के साथ लेता हूं। जिनका नाम सर्वगिय श्री राजीव भाई दीक्षित जी है। इनका जन्म 30 नम्बंर 1967 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के नाहा गांव में हुआ। इनके पिता का नाम राधेश्याम दीक्षित और मां का नाम मिथलेश दीक्षित था। राजीव भाई पुरी जिंदगी शादी नहीं की थी। वो हमेशा देश के लिए अपने आप को बनाए रखा।




राजीव जी के बारे में ऐ जानकारी बहुत कम है। बो एक ऐसे व्यक्ति थे। जिन्होंने अपने देश के लिए बहुत कुछ किया। राजीव भाई दीक्षित बचपन से ही पढ़ाई में बहुत अच्छे थे। इसलिए intermediate की पढ़ाई फिरोजाबाद से और B.tech इलाहाबाद(अब-प्रयागराज) से पुरी की थी। फिर indian institute of technology kanpur से M.tech की पढ़ाई करके एक होंनहार इंजीनियर के तौर पर कुछ समय भारत के CISR और फ्रांस के telecom munication center में भी काम किया। लेकिन उन्होंने देश के लिए कुछ करने का सपना देखा था।वह उधम सिंह, भगतसिंह और चंद्रशेखर आज़ाद से बहुत प्रेरित थे।

Read related Article 👇

👉 अयोध्या का इतिहास और राम जन्म भूमि का सच.

👉 जानिए Sindhu Tai बारे में जिसने शमशान की चिता पर रोटी पका कर हजारों अनाथ बच्चों को पाला

👉 जानिए प्रिया प्रकाश के बारे में

👉 जय भीम जय मीम की असलियत बताती जोगेन्द्रनाथ मंडल की कहानी

👉 Pm Modi को धमकी देने वाली पाक सिंगर की न्यूड फोटो और वीडियो लीक हुई


राजीव भाई दीक्षित जी की एक घटना जो उनके जीवन से जुड़ी हैं।

Rajiv dixit Biography

जब वो फ्रांस में थे तो वहां telecom munication center में एक भाषण देना था। वहां बहुत से देशों के लोगों का भाषण दिया था। जब राजीव भाई ने भाषण शुरू किया अंग्रेजी भाषा में बोलने लगे भाषण समाप्त हुआ तो वहां एक व्यक्ति (सिंव्डन मुल के) ने उन्हें बोला कि आप भारत के हैं तो आप ने अपनी भाषण अपने मातृभाषा में क्यो नही दिया। यहां मौजूद सभी लोगों ने अपनी मातृभाषा में भाषण दिया और आप ने हिंदी छौड़ के अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया। यहां मौजूद technology से हर भाषा convart होती है।



 तब से राजीव भाई ने भी अंग्रेजी छौड़ के अपनी मातृभाषा हिंदी में भाषण और व्यांख्न देने लगे और लोगों को भी अपिल कि बह अपने बच्चों को अंग्रेजी न पढ़ाए बल्कि अपने मातृभाषा की शिक्षा के साथ पढ़ाएं । इससे ये होगा कि आपके बच्चों भी अच्छा है । जैसे कि कोई व्यक्ति किसी भी चीज को जल्दी समझ सकते हैं। जैसे मराठी व्यक्ति को कोई बंगाली भाषा में शिक्षा देने वो सिखेगा लेकिन उसे ज्यादा समय लगेगा। किसी गुजराती को तेलगु भाषा में सिखने में समय लगेगा। इसलिए गुजराती को गुजराती मे सिखना आसान हो जाता हैं। इसलिए उन्होंने कहा कि English madiam स्कुल में अपने बच्चों को न पढ़ाएं


स्वदेशी भारत की शुरूआत 

 फ्रांसे आने के बाद उन्होंने देखा कि देश में विदेशों से बहुत घटिया सामग्री भारत में बेचकर पुरा मुनाफा विदेश ले जाते थे। इसलिए उन्होंने स्वदेशी आंदोलन शुरू किया और लोगों को बताया की विदेशी समाग्री की गुणवत्ता बहुत खराब है और हमसे ज़्यादा पैसे भी लिया जाता है। ऐसे ही धिरे धिरे वो गांव-गांव, शहर-शहर गए और बताया कि विदेशी बस्तु ना आपके लिए सही है ना देश के लिए । वे बहुत ही कम समय में 12 हजार व्यांख्न दिया। उनके व्याख्यानों में दिए गए तत्थो कोई भी व्यक्ति गलत नहीं साबित कर सकते हैं।



धीरे धीरे वह 5000 विदेशी कंपनियों को बंद करने का फैसला किया और लोगों को बताया की ये कंपनियां हमारे देश में विदेशों से जहर लाकर बेच रही है और आप उसे किमत देकर खा रहे हैं।वे अपने व्यांख्नो में प्रंची बांटा करते थे कि कौन विदेशी बस्तु और कौन स्वदेशी बस्तु है ,वह हमेशा लोगों से अपील करते थे कि विदेशी बस्तु ना खरीदें तो हीं देश के अर्थब्यव्सथा लिए उत्तम होगा। तब हमारी अर्थब्यव्सथा भी मजबूत होगी।



 इस तरह वह लोगों के चहेते हो गए थे। फिर 9 जनवरी 2009 में वह खुद Bharat savimaan trust की तहत रामदेव बाबा के साथ मिलकर काम करने लगे। जहां उन्होंने बताया कि हम दोनों मिलकर भारत को विश्वगुरु साबित करना चाहते हैं।वे दोनों मिलकर anti corruption Organization से बहुत सारे corrupt मंत्री के बारे में लोगों को बताया और अपिल कि इसको संसद से बाहर निकल कर जेल भेजो। इसी बीच राजीव भाई और बाबा रामदेव कुछ बातों में बहस भी हो जाती थी। फिर कुछ सोच बिचार के आगे बढ़ते रहे।


राजीव भाई दीक्षित जी की रहस्यमय मौत


Rajiv Dixit


वो तारीख 30 नंम्बर 2010 को वो छत्तीसगढ़ के भिलाई से दुर्ग व्याखंन देने जा रहे थे। उसी बीच उन्हें दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गईं और उनकी पार्थिव शरीर को पतंजलि योगपीठ लेकर चले गए। लेकिन उनके चाहने वाले उनके हत्या का संदेह करते हैं। बाबा रामदेव को दोष देते हैं कि जब उनका शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया तो उनका शरीर निला हो गया था जैसे किसी ने उन्हें जहर दिया गया हो।फिर भी रामदेव ने न उनका पोस्टमॉर्टम कराया ना और कुछ भी। आज भी उनकी मौत की असली वजह पता नहीं है।

Post a comment

0 Comments