जानिए Sindhu Tai बारे में जिसने शमशान की चिता पर रोटी पका कर हजारों अनाथ बच्चों को पाला

Sindhu Tai sakpal

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 सिंधुताई की प्रारंभिक जीवन और शिक्षा   

सिंधुताई का जन्म 14 नवंबर को महाराष्ट्र के वर्धा जिले में एक बोहद गरीब मवेशी चराने वाले परिवार में हुआ था। उसके पिता उसे शिक्षित करने के लिए उत्सुक थे, लेकिन माँ नहीं थी। अभिमानजी (सिंधुताई के पिता) उन्हें मवेशी चराने के बहाने स्कूल भेजते थे, लेकिन गरीबी के कारण एक असली स्लेट का खर्च नहीं उठा सकते थे, इसलिए वह एक स्लेट के रूप में 'भड़डी के पेड़' के पत्ते का उपयोग करती थी। गरीबी और छोटी उम्र में विवाह के कारण उसने शिक्षा छोड़ दिया
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10 साल की उम्र में उसकी 30 साल की उम्र के एक व्यक्ति से शादी हो गई थी। शादी के बाद उसे एक कठिन जीवन का सामना करना पड़ा लेकिन उसने आशा नहीं खोई। अपने नए घर में उन्होंने वन विभाग और जमींदारों द्वारा गोबर एकत्र करने वाली स्थानीय महिलाओं के शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी। और इस आंदोलन में उसकी जीत हुई। इस आंदोलन बाद उसके काफी विरोधी बन गए इससे उसके लिए चीजों को और अधिक कठिन बना दिया।




बीस साल की छोटी उम्र में जब नौ महीने की गर्भवती थी। तब उसके पति ने उसे बहुत मारा पीटा और कस कर उसके पेट पर एक लात मारी तो वे बेहोश हो गयी उसके बाद उसके पति ने उसे खींचते खींचते गाय के तबेला पर ले गया और गाय को उनके ऊपर छोड़ दिया। उसके पति ने उसे वह मरने को छोड़ दिया लेकिन गायों ने उनके ऊपर कुछ भी नुकसान नहीं पहुंचाया। हालात इतने बुरे हो गए कि उन्हें गौशाला में अपनी बच्ची को जन्म देना पड़ा. वो बताती हैं कि उन्होंने अपने हाथ से अपनी नाल काटी.



 कोई उम्मीद नहीं बची होने पर वह अपनी मां के यहाँ चली गई। लेकिन उसकी मां ने उसे शरण देने से इनकार कर दिया। उसने आत्महत्या करने के लिए सोची  लेकिन वह अपने बच्चे के बारे में सोच कर रुक जाता था



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उसे कई दिनों तक शमशान की चिता पर रोटी पका कर खानी पड़ी

Sindhu Tai sakpal

जिंदा रहने के भीख मांगने लगी। वह रात कब्रिस्तान में बिताती थी क्योंकि उसे रात में पुरुषों द्वारा उठाया जाने का डर था। उसकी हालत ऐसी थी कि उसे कई दिनों तक शमशान की चिता पर रोटी पका कर खानी पड़ी। लोग उसे रात में कब्रिस्तान में देखे जाने के बाद से उसे भूत कहते थे। भोजन के लिए रेलवे प्लेटफार्मों पर भीख माँगना शुरू कर दिया। भीख मांगने के दौरान वो ऐसे कई बच्चों के संपर्क में आईं जिनका कोई नहीं था. उन बच्चों में उन्हें अपना दुख नजर आया और उन्होंने उन सभी को गोद ले लिया. उन्होंने अपने साथ-साथ इन बच्चों के लिए भी भीख मांगना शुरू कर दिया. इसके बाद तो सिलसिला चल निकला. जो भी बच्चा उन्हें अनाथ मिलता वो उसे अपना लेतीं. वो सड़कों पर भीख मांगती ताकि अनाथ
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 अब तक वो 1400 से अधिक बच्चों को अपना चुकी हैं. वो उन्हें पढ़ाती है, उनकी शादी कराती हैं और जिन्दगी को नए सिरे से शुरू करने में मदद करती हैं. ये सभी बच्चे उन्हें माई कहकर बुलाते हैं. बच्चों में भेदभाव न हो जाए इसलिए उन्होंने अपनी बेटी किसी और को दे दी. आज उनकी बेटी बड़ी हो चुकी है और वो भी एक अनाथालय चलाती है. 80 साल की उम्र में, उनके पति ने उनसे माफी मांगी। और सिंधुताई मैं उसे माफ कर दिया। उसने उसे अपने बच्चे के रूप में स्वीकार किया कि वह केवल एक माँ है!  व्यक्ति में, वह ऊर्जा के असीमित स्रोत और बहुत शक्तिशाली प्रेरणा के रूप में आता है




सिंधुताई का परिवार बहुत बड़ा है. उनके 207 जमाई है, 36 बहुएं हैं और 1000 से अधिक पोते-पोतियां हैं. 80 साल के उम्र आज भी वो अपने काम को बिना रुके करती जा रही हैं. वो किसी से मदद नहीं लेती हैं बल्कि खुद स्पीच देकर पैसे जमा करने की कोशिश करती हैं.




उसने अपना पूरा जीवन अनाथ बच्चों के लिए समर्पित कर दिया है।


 इसलिए उसे प्यार से 'माई' (मां) कहा जाता है। उसने 1,200 अनाथ बच्चों का पालन-पोषण किया है। आज तक, उसके 210 दामाद, छत्तीस पुत्रियां और एक हजार से अधिक पोते-पोतियों का एक भव्य परिवार है। जिन बच्चों को उसने गोद लिया उनमें से कई पढ़े-लिखे वकील और डॉक्टर हैं, और उसका एक बच्चा उसके जीवन पर पीएचडी कर रहा है। उनके समर्पण और काम के लिए उन्हें 280 से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उसने अपने बच्चों के लिए घर बनाने के लिए जमीन खरीदने के लिए पुरस्कार राशि का इस्तेमाल किया। सनमाती बाल निकेतन पुणे के हडपसर में मंजरी इलाके में बनाया जा रहा है, जहां 400 से अधिक बच्चे निवास करगे


सिंधुताई सपकाल के पर कई  फिल्म बन चुकी हैं

2010 में आई अनंत महादेवन की मराठी फिल्म Mee Sindhutai Sapkal, सिंधु ताई की सच्ची कहानी से प्रेरित है। फिल्म को 54 वें लंदन फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर के लिए चुना गया


सिंधुताई को पुरस्कार

सिंधु ताई


सिंधुताई को 800 से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।


Sindhu Tai नाम पर 6 संस्थाएं चलती हैं जो अनाथ बच्चों की मदद करती हैं।

Sindhu Tai sapkal

सनमती बाल निकेतन, भेलहेकर वस्ती, हडपसर, पुणे

 ममता बाल सदन, कुंभारवलन, सासवद

 माई का आश्रम चिखलदरा, अमरावती

 अभिमान बाल भवन, वर्धा

 गंगाधरबाबा छत्रालय, गुहा

 सप्तसिंधु 'महिला अधार, बालसंगोपन Aani शिक्षण संस्थान, पुणे

मेरी आप सभी लोगों से विनती है कि आपसे जितनी हो सके आप इनकी मदद करे मदद करने के लिए नीचे दी गई website कि लिंक पर क्लिक करके उनके Website में जाकर पैसे डोनेट कर सकते हैं

https://www.sindhutaisapakal.org






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